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1Booti Brahmi Churn


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SKU: BBC.

Categories: HAIR MEN , SKIN , WOMEN

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न्‍यूरॉन में एमिलॉयड (amyloid) यौगिक की उपस्थिति मस्तिष्‍क के नुकसान और अल्‍जाइमर रोग को बढ़ाने के लिए जिम्‍मेदार है। ब्राम्‍ही में जैव-रासायनिक बाकोसाइड यौगिक मस्तिष्‍क कोशिकाओं को प्रभावित करता है और मस्तिष्‍क के ऊतक (brain tissue) के पुन: निर्माण में मदद करता है। इस प्रकार अल्‍जाइमर रोग के उपचार के‍ लिए ब्राम्‍ही फायदेमंद होता है। आप अपने गिरते बालों को कम करने के लिए ब्राम्‍ही के तेल (Brahmi oil) का उपयोग कर सकते हैं। इस तेल को सिर पर लगाने से यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है। इस तेल से सिर की मालिश करने से रूसी, सिर की खुजली (itchiness), और बालों के उलझने को रोकने के लिए फायदेमंद होता है। आयुर्वेदिक जड़ी बूटीयों में एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidants) की उपस्थिति शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने में मदद करती है, खासतौर से त्‍वचा की ऊपरी परत की समस्‍याओं में सुधार करता है और त्‍वचा कोशिकाओं के पुनर्जन्‍म को उत्‍तेजित करता है। यह आंतरिक त्‍वचा के लिए भी अच्‍छा होता है जो पाचन तंत्र में उपस्थित सूक्ष्‍मजीवों (microbes) के कार्यो में मदद करता है। ब्राम्‍ही का उपयोग सोरायसिस (psoriasis), एक्जिमा, फोड़ा के इलाज में किया जाता है। आप अपने सिर की मालिश (scalp massage) ब्राम्‍ही तेल से करके नींद विकार को दूर कर सकते हैं, जिससे अवसाद, तनाव और चिंता आदि को ठीक करने में मदद मिलती है। यदि कोई व्‍यक्ति नकारात्‍मक विचारों (negative domains) से पीड़ित है तो ऐसे व्‍यक्ति को ब्राम्‍ही तेल को उपयोग करने की सलाह दी जाती है। ऐसे व्‍यक्ति को प्रतिदिन रात में इस तेल से अपने सिर की मालिश करना चाहिए। यह अति सक्रिय बच्‍चों (hyperactive children) के लिए भी फायदेमंद होता है। मस्तिष्‍क में उपस्थित कोर्टिसोल (cortisol) तनाव का प्रमुख कारण माना जाता है। कार्टिसोल हार्मोन (cortisol hormen) के स्‍तर को कम करने के लिए ब्राम्‍ही का उपयोग किया जा सकता है जो तनाव को कम करने और मूड को ठीक करने के रूप में कार्य करता है। ब्राम्‍ही तनावपूर्ण स्थितियों को अपनाने के दौरान अनुकूलन बनाने में सहायता करता है। ब्रम्‍ही और तुलसी के पत्‍तों की चाय लेना मुश्किल समय (rough times) का सामना करना आसान बनाता है। यदि आप भी ऐसी ही किसी परेशानी का शिकार हैं तो ब्रम्‍ही का उपयोग करे यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। हमारे याद रखने की क्षमता का सीधा संबंध मस्तिष्‍क की कार्यप्रणाली से होता है। ब्राम्‍ही मस्तिष्‍क के हिप्‍पोकैम्‍पस हिस्‍से (hippocampus part) को प्रभावित करता है जो चतुराई, स्‍मृति और एकाग्रता के लिये जिम्‍मेदार है। ब्राम्‍ही का पाउडर अति सक्रिय बच्‍चों के लिए भी फायदेमंद होता है। ब्राम्‍ही सेरिबैलम के साथ लाभदायक गुण दिखाता है जिससे स्‍मृति और एकाग्रता को बढ़ाने में मदद मिलती है। बाकोपा (ब्राह्मी का प्रयोग लंबे समय से न्‍यूरोलॉजिकल टानिक और संज्ञानात्‍मक सुधार (cognitive improvement) के रूप किया जा रहा है। वाचा (Vacha) के साथ ब्राम्‍ही का सेवन न्‍यूरोलॉजिकल समस्‍या (मिर्गी) के इलाज में किया जाता है। रसायन बाकोसाइड्स ए और बी मस्ति‍ष्‍क कोशिकाओं के बीच न्‍यूरो-ट्रासमिशन में सुधार करता है और न्‍यूरॉन क्षति की मरम्‍मत करने में भी मदद करते हैं। ब्राम्‍ही के गुण न्‍यूरो-अपघटन (neuro-degeneration) को कम करते है। जब ब्राम्‍ही को चाय के रूप में सेवन किया जाता है या सीधे ही पत्‍तों को चबाया जाता है, तो यह आपके श्र्वशन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ा सकता है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, congestion, छाती की सर्दी, नाड़ी अवरोध के लिए आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। ब्राम्‍ही अतिरिक्‍त कफ और श्‍लेष्‍म को साफ कर सकता है और श्र्वशन तंत्र में सूजन से आपको राहत प्रदान करने के लिए उपयोगी होता है। ब्राह्मी (Bacopa) की पत्तियों को चाय या अन्‍य प्रकार से सेवन करते हैं तो ब्राम्‍ही आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करती है। पोषक तत्‍व एंटीऑक्‍सीडेंट यौगिकों द्वारा पूरे होते हैं जो रोगजनक वायरस या जीवाणु संक्रमण के खिलाफ हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity system) को बढ़ाने के लिए हमारी मदद करते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि ब्राम्‍ही को रक्‍त शर्करा के स्‍तर में वृद्धि करने में मदद करती है। इसलिए मधुमेह के लक्षणों के आधार पर यह आपके हाइपोग्‍लाइसेमिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और आपके सामान्‍य और स्‍वस्‍थ्‍य जीवन (healthy life) जीने में मदद करता है। यदि आपके शरीर में शुगर का स्‍तर कम हो तो आप ब्राम्‍ही का उपयोग कर सकते हैं लेंकिन फिर भी आपको सलाह दी जाती है कि इसका सेवन करने से पहले एक बार अपने डाक्‍टर से जरूर संपर्क करें। पीड़ा नाशक और सुखदायक (sedative and soothing herb) जड़ी बूटी के रूप में ब्राम्‍ही को जाना जाता है। इन गुणों के साथ साथ ब्राम्‍ही में एंटी-इंफ्लामैट्री गुण भी होते हैं जो अल्‍सर और पेट की अन्‍य समस्‍याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं। यह आपके पाचन तंत्र (digestive system) के लिए भी लाभकारी होते है। यदि आप पाचन से सं‍बंधित किसी परेशानीयों का सामना कर रहे हैं तो ब्राम्‍ही का उपयोग करें यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
न्‍यूरॉन में एमिलॉयड (amyloid) यौगिक की उपस्थिति मस्तिष्‍क के नुकसान और अल्‍जाइमर रोग को बढ़ाने के लिए जिम्‍मेदार है। ब्राम्‍ही में जैव-रासायनिक बाकोसाइड यौगिक मस्तिष्‍क कोशिकाओं को प्रभावित करता है और मस्तिष्‍क के ऊतक (brain tissue) के पुन: निर्माण में मदद करता है। इस प्रकार अल्‍जाइमर रोग के उपचार के‍ लिए ब्राम्‍ही फायदेमंद होता है। आप अपने गिरते बालों को कम करने के लिए ब्राम्‍ही के तेल (Brahmi oil) का उपयोग कर सकते हैं। इस तेल को सिर पर लगाने से यह बालों की जड़ों को मजबूत करता है। इस तेल से सिर की मालिश करने से रूसी, सिर की खुजली (itchiness), और बालों के उलझने को रोकने के लिए फायदेमंद होता है। आयुर्वेदिक जड़ी बूटीयों में एंटीऑक्‍सीडेंट (antioxidants) की उपस्थिति शरीर से विषाक्‍त पदार्थों को दूर करने में मदद करती है, खासतौर से त्‍वचा की ऊपरी परत की समस्‍याओं में सुधार करता है और त्‍वचा कोशिकाओं के पुनर्जन्‍म को उत्‍तेजित करता है। यह आंतरिक त्‍वचा के लिए भी अच्‍छा होता है जो पाचन तंत्र में उपस्थित सूक्ष्‍मजीवों (microbes) के कार्यो में मदद करता है। ब्राम्‍ही का उपयोग सोरायसिस (psoriasis), एक्जिमा, फोड़ा के इलाज में किया जाता है। आप अपने सिर की मालिश (scalp massage) ब्राम्‍ही तेल से करके नींद विकार को दूर कर सकते हैं, जिससे अवसाद, तनाव और चिंता आदि को ठीक करने में मदद मिलती है। यदि कोई व्‍यक्ति नकारात्‍मक विचारों (negative domains) से पीड़ित है तो ऐसे व्‍यक्ति को ब्राम्‍ही तेल को उपयोग करने की सलाह दी जाती है। ऐसे व्‍यक्ति को प्रतिदिन रात में इस तेल से अपने सिर की मालिश करना चाहिए। यह अति सक्रिय बच्‍चों (hyperactive children) के लिए भी फायदेमंद होता है। मस्तिष्‍क में उपस्थित कोर्टिसोल (cortisol) तनाव का प्रमुख कारण माना जाता है। कार्टिसोल हार्मोन (cortisol hormen) के स्‍तर को कम करने के लिए ब्राम्‍ही का उपयोग किया जा सकता है जो तनाव को कम करने और मूड को ठीक करने के रूप में कार्य करता है। ब्राम्‍ही तनावपूर्ण स्थितियों को अपनाने के दौरान अनुकूलन बनाने में सहायता करता है। ब्रम्‍ही और तुलसी के पत्‍तों की चाय लेना मुश्किल समय (rough times) का सामना करना आसान बनाता है। यदि आप भी ऐसी ही किसी परेशानी का शिकार हैं तो ब्रम्‍ही का उपयोग करे यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। हमारे याद रखने की क्षमता का सीधा संबंध मस्तिष्‍क की कार्यप्रणाली से होता है। ब्राम्‍ही मस्तिष्‍क के हिप्‍पोकैम्‍पस हिस्‍से (hippocampus part) को प्रभावित करता है जो चतुराई, स्‍मृति और एकाग्रता के लिये जिम्‍मेदार है। ब्राम्‍ही का पाउडर अति सक्रिय बच्‍चों के लिए भी फायदेमंद होता है। ब्राम्‍ही सेरिबैलम के साथ लाभदायक गुण दिखाता है जिससे स्‍मृति और एकाग्रता को बढ़ाने में मदद मिलती है। बाकोपा (ब्राह्मी का प्रयोग लंबे समय से न्‍यूरोलॉजिकल टानिक और संज्ञानात्‍मक सुधार (cognitive improvement) के रूप किया जा रहा है। वाचा (Vacha) के साथ ब्राम्‍ही का सेवन न्‍यूरोलॉजिकल समस्‍या (मिर्गी) के इलाज में किया जाता है। रसायन बाकोसाइड्स ए और बी मस्ति‍ष्‍क कोशिकाओं के बीच न्‍यूरो-ट्रासमिशन में सुधार करता है और न्‍यूरॉन क्षति की मरम्‍मत करने में भी मदद करते हैं। ब्राम्‍ही के गुण न्‍यूरो-अपघटन (neuro-degeneration) को कम करते है। जब ब्राम्‍ही को चाय के रूप में सेवन किया जाता है या सीधे ही पत्‍तों को चबाया जाता है, तो यह आपके श्र्वशन स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ा सकता है। इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, congestion, छाती की सर्दी, नाड़ी अवरोध के लिए आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है। ब्राम्‍ही अतिरिक्‍त कफ और श्‍लेष्‍म को साफ कर सकता है और श्र्वशन तंत्र में सूजन से आपको राहत प्रदान करने के लिए उपयोगी होता है। ब्राह्मी (Bacopa) की पत्तियों को चाय या अन्‍य प्रकार से सेवन करते हैं तो ब्राम्‍ही आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करती है। पोषक तत्‍व एंटीऑक्‍सीडेंट यौगिकों द्वारा पूरे होते हैं जो रोगजनक वायरस या जीवाणु संक्रमण के खिलाफ हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity system) को बढ़ाने के लिए हमारी मदद करते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि ब्राम्‍ही को रक्‍त शर्करा के स्‍तर में वृद्धि करने में मदद करती है। इसलिए मधुमेह के लक्षणों के आधार पर यह आपके हाइपोग्‍लाइसेमिया को बेहतर बनाने में मदद करता है और आपके सामान्‍य और स्‍वस्‍थ्‍य जीवन (healthy life) जीने में मदद करता है। यदि आपके शरीर में शुगर का स्‍तर कम हो तो आप ब्राम्‍ही का उपयोग कर सकते हैं लेंकिन फिर भी आपको सलाह दी जाती है कि इसका सेवन करने से पहले एक बार अपने डाक्‍टर से जरूर संपर्क करें। पीड़ा नाशक और सुखदायक (sedative and soothing herb) जड़ी बूटी के रूप में ब्राम्‍ही को जाना जाता है। इन गुणों के साथ साथ ब्राम्‍ही में एंटी-इंफ्लामैट्री गुण भी होते हैं जो अल्‍सर और पेट की अन्‍य समस्‍याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं। यह आपके पाचन तंत्र (digestive system) के लिए भी लाभकारी होते है। यदि आप पाचन से सं‍बंधित किसी परेशानीयों का सामना कर रहे हैं तो ब्राम्‍ही का उपयोग करें यह आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

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